KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

शहीद पर कविता

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शहीद पर कविता

ढह गई वह इमारत
जिसके लोकार्पण के
पत्थर की सीमेंट
नहीं सूखी अभी तलक
जिसके निर्माण की फाईल
अभी हुई थी पास
हाल ही में हुए थे
इंजीनीयर के हस्ताक्षर
फाईल पर
इमारत क्यूं न ढहे
इसने खड़ी कर दी
कितनी आलीशान इमारतें
ठेकेदार की कोठी
इंजीनीयर का बंगला
बड़े बाऊ का फलैट
इस इमारत को
मिलना ही चाहिए
शहीद का दर्जा
जो ठेकेदार, इंजीनीयर
व बड़े बाऊ के
भवन पर
हो गई कुर्बान

-विनोद सिल्ला

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2 Comments
  1. विनोद सिल्ला says

    धन्यवाद रामपाल इंदौरा

  2. Rampaul Indora says

    बहुत सुंदर रचना।