KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

शहीदों पर कविता की चिताओं पर

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शहीदों पर कविता

गूंज रही थीं
स्वरलहरियां
‘शहीदों की चिताओं पर
लगेंगे हर वर्ष मेले’
अवसर था
एक शहीद की
चिता पर लगे मेले का
इस मेले में हुए एकत्रित
शहीद की जाति के लोग
था आयोजन का मुख्यातिथि
शहीद की जाति का सफेदपोश
जिसने बताया शहीद को
अपनी जाति का गौरव
अपनी जाति का
मान-सम्मान
संकीर्णता ने
शहीद की
शहादत का दायरा
कर दिया
कितना संकुचित
और कर लिए
अपनी जाति के
सभी वोट पक्के

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