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शृंगार छंद विधान

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शृंगार छंद विधान

  • १६ मात्रिक छंद
  • आदि में ३,२ त्रिकल द्विकल
  • अंत में २,३ द्विकल त्रिकल
  • दो दो चरण सम तुकांत
  • चार चरण का एक छंद

श्रेष्ठ हो मेरा हिन्दुस्तान

आरती चाह रही है मात।
भारती अंक मोद विज्ञात।
सैनिको करो प्रतिज्ञा आज।
शस्त्र लो संग युद्ध के साज।

विश्व मानवता हित में कर्म।
सत्य है यही हमारा धर्म।
आज आतंक मिटाना मीत।
विश्व की सबसे भारी जीत।

पाक को पाठ पढाओ वीर।
धारणा में बस रखना धीर।
भावना देश हितैषी पाल।
कूदना बन दुश्मन का काल।

वंदना मातृ भूमि की बोल।
शंख या बजा युद्ध के ढोल।
गंग सौगंध निभे मन प्रीत।
मात का दूध त्याग की रीत।

सूर्य में तम को ढूँढे पाक।
सिंह पूतो पर थोथी धाक।
प्रश्न है संग हुए आजाद।
पाक पापी न हुआ आबाद।

रोक क्या सके विकासी गान।
शत्रु को सिखलादो ये ज्ञान।
एकता की दे कर आवाज।
तोड़ दो आतंकों का राज।

जोड़ दो मन से मन की तान।
भारती की रखनी है शान।
उच्च हो ध्वजा तिरंगा मान।
श्रेष्ठ हो मेरा हिन्दुस्तान।

बाबू लाल शर्मा बौहरा
सिकंदरा दौसा राजस्थान

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