श्यामू की दीवाली-मनीभाई नवरत्न

श्यामू की दीवाली

श्यामू एक गरीब लड़का है।वह  उसकी मां का एक मात्र सहारा भी। श्यामू की मां पड़ोस के घर में झाड़ू पोछा  लगाती थी । उसकी गरीबी की हालत से श्यामू अच्छी तरह से वाकिफ था।
श्यामू को दीपावली त्यौहार बहुत पसंद था ।

जब दीपावली त्यौहार का समय नजदीक आया तो वह बहुत खुश था । इसका मतलब यह कतई नहीं है कि उसे औरों की तरह ढेर सारे पटाखे , मिठाई और नए कपड़े का मिलने वाले थे।
दीपावली के रात जब पड़ोस में धूमधाम से पटाखे चलाए जा रहे थे ,तो वह उछलता कूदता वहां पर पहुंच गया। जब पटाखे जलते तो वह खुशी से नाचता। उसकी खुशी , पड़ोसी के बच्चों के खुशी पर भारी पड़ रहा था।  यह नजारा देखकर श्यामू की मां की आंखों में सुखदुख से मिश्रित आंसू आ गए ।

श्यामू की मां की दीपावली श्यामू की खुशी ही थी और उसका दीपक उसका बेटा श्यामू, जो उसके जीवन को प्रकाशित कर रहा था।
( लेखक:- मनीभाई)

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