KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

सम्भल जाओ आज से- प्रिया सिंह

1 1,699

सम्भल जाओ आज से- प्रिया सिंह

भारत वर्ष की बेटी हूं, समझ गई अपना अधिकार ।
अन्याय नहीं सहन करेंगे, अब मेरी भी वाणी में धार।
अब चाहोगे तुम रोकना हमें , अपने आदतन अंदाज से।
पर रोकने वाले!  खुद रुक जाओ, सम्भल जाओ आज से ।

जितना करना था अत्याचार हम पर, उसको हम सह गये।
सहते सहते तेरा दुर्व्यवहार, हम केवल घर तक ही रह गये।
जाना न था हममें भी लावा ,जो जला के रख दे तुझे राख से।
अब रोकने वाले ! खुद रुक जाओ, सम्भल जाओ आज से ।

सोचने की भूल मत करना कि, हम हैं जल की शीतल धार।
प्रज्वलित ज्वाला की ज्योति हम, बहती तेज नदी की धार ।
अब मैंने अपनी वजूद को जाना , तू ये जान ले आज से।
हां रोकने वाले! खुद रुक जाओ, सम्भल जाओ आज से ।

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.

1 Comment
  1. Rishu Rani says

    it’s amazing… It inspire me..