KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

सूनापन पर गीत

0 94

सूनापन पर गीत

आजाओ न तुम बिन सूना सूना लगता है
न जाओ न तुम बिन सूना सूना लगता है
जिसकी डाली पे हम दोनों झूला करते थे
वो झूला वो बरगद सूना सूना लगता है
दिन में तुम्हारा साथ रात में ख़्वाब होते थे
बिना तुम्हारे सावन सूना सूना लगता है
जिन आँखों में सदा तुम्हारा अक्स समाया था
उन आँखों का काजल सूना सूना लगता है
तेरे साथ जो जलवा जो अंदाज़ हमारा था
अपने दिल का ही साज़ सूना सूना लगता है
तेरे होने से हर सू एक चहल पहल सी थी
मुझको अब ये घर बार सूना सूना लगता है
जब तक तेरी ‘चाहत’ का अहसास नहीं भर दूँ
हर इक ग़ज़ल हर गीत सूना सूना लगता है

नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी

Leave A Reply

Your email address will not be published.