KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ

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सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ

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सरस्वती दाई तोर पइयां लागव ओ।
कंठ में बिराजे जेकर भाग जागय ओ।
तोरे आसरा म नान्हे लइका पढ़ जाथे।
बुद्धि पाके ज्ञानी कलाकार बन जाथे।
मन ल भरमा के तंय,
धार ल ठहरा के तंय।
डहके डुबत नइयां लागय ओ।
सरसती दाई ………
बिनती हावय दाई सब ल ज्ञान म नौहादे।
दुखिया ल सुख दे तंय पीरा बिसरादे
अंतस में रम के तंय,
अंजोरी कस बर के तंय।
तीपत घाम घलो छइहां लागय ओ।
सरसती दाई तोर पइयां लागव ओ।
माथ म बिराजे ओकर भाग जागय ओ।
नाम – तेरस कैवर्त्य ‘ऑसू’
गांव – सोनाडुला, (बिलाईगढ़)
जिला – बलौदाबाजार-भाटापारा (छ. ग.)
मोबाइल 9399169503, 9165720460
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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