KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

सुगन्धित फूल हूं गुलाब का

गुलाब एक फूल जो महकता सरे जहा को

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सुगन्धित फूल हूं गुलाब का

रंग बिरंगा सुगन्धित फूल हूं गुलाब का ,
तिरस्कार कर मुझे सड़कों पर मत फैंकिये |
दीजिये अपनी प्रेमिका प्रेमी को ,
जरा सा प्यार मोहब्बत का इज़हार तो कीजिये |
सजा के उसकी घनी जुल्फों में ,
मौसमे बहार का इंतजार तो कीजिये |
सुबह की नमस्कार के साथ ,
यार दोस्तों के दिल को खुश तो कीजिये |
अजी दीजिये गुलाब किसी दुखी बीमार को ,
फिर चेहरे पर मुस्कराहट तो देखिये |
काले पीले लाल गुलाबी रंग के पंख ,
काले कोट में सजा कर तो देखिये |
भगवान के दरबार को एक बार सजाये ,
सुगन्ध से एक बार महका के तो देखिये ||
रंग बिरंगा ..

कमल कुमार “आजाद”
बिलासपुर छत्तीसगढ़

13/०९/२०२१

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