KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिंदी संग्रह कविता-स्वागत! जीवन के नवल वर्ष

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स्वागत! जीवन के नवल वर्ष


स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
आओ, नूतन-निर्माण लिये
इस महा जागरण के युग में,
जागृत जीवन अभिमान लिये।


दीनों-दुखियों का मान लिये,
मानवता का कल्याण लिये।
स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष
तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।


संसार क्षितिज पर महाक्रान्ति
की चालाओं के गान लिये,
मेरे भारत के लिए नई
प्रेरणा, नया उत्साह लिये;


मुर्दा शरीर में नये प्राण
प्राणों में नव अरमान लिये,
स्वागत! स्वागत! मेरे आगत!
तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।


युग-युग तक नित पिसते आये,
कृषकों को जीवन-दान लिये,
कंकाल मान रह गये शेष,
मज़दूरों का नव माण लिये।

श्रमिकों का नव संगठन लिये,
पददलितों का उत्थान लिये,
स्वागत ! स्वागत! मेरे आगत
आओ तुम स्वर्ण विहान लिये।


जीवन की नूतन क्रान्ति लिये
क्रान्ति में नये-नये बलिदान लिये
स्वागत ! जीवन के नवल वर्ष
आओ, तुम स्वर्ण-विहाल लिये।

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