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स्वास्थ्य जीवन है- मनीभाई नवरत्न

यह कविता 7 अप्रैल विश्व स्वास्थ्य संगठन की स्थापना पर विश्व स्वास्थ्य दिवस पर विशेष ध्यान देकर रचित की गई है।

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स्वास्थ्य जीवन है- मनीभाई नवरत्न

स्वास्थ्य जीवन है।
स्वास्थ्य ही धन है।
स्वास्थ्य से परे
ना उन्नति,अमन है।

स्वस्थ व्यक्ति से स्वस्थ समाज ।
स्वस्थ समाज से विकसित राज ।
विकसित देश बनाये चलो मिलके,
योग व संयम को अपनालें आज।

जीवन हो अपनी प्राकृतिक ।
आहार हो बिल्कुल संतुलित ।
व्यवहार में मधुरता हो मिश्रित ।
आचार-विचार हों अपनी संयमित।

इस हेतु जुड़े आध्यात्म से
साहित्य,संगीत और सत्संग से ।
अपना स्वास्थ्य है अपने हाथ,
मिलना सभी से प्रसन्न और उमंग से।

आज भटकते देश के कर्णधार ।
कृत्रिम खान पान की हुई भरमार।
भागमभाग तनाव जीवन में
शरीर बन चुका रोगों का भंडार ।

आओ समझें अब असलियत ।
ना कम होने पायें शारीरिक मेहनत ।
अच्छी स्वास्थ्य के बिना सब व्यर्थ ।
आज बनी सेहत सबसे बड़ी जरूरत ।

manibhainavratna
manibhai navratna


(रचयिता :- मनी भाई )  

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