कविता 05 स्वतंत्र हो चलें- मनीभाई”नवरत्न”

कविता 05
स्वतंत्र हो चलें
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हर जगह रूप है ,
एक उसी का।
जिसे लोग अल्लाह-ईश्वर कहते हैं।
फिर क्यों लोगों ने…?
हमको ये कहा
अल्लाह मस्जिद में,
ईश्वर मंदिर में रहते हैं।
हमने समेट लिया खुद को
अपनी अपनी खुदा को समेट कर
गिरवी रख दी वजूद को
अपना विवेक खो कर।
आखिर हमें
किस बात का डर?
ये दूरियां हममें
क्यों कर गई घर?
मन में  समत्व भर
अब तो स्वतंत्र हो चलें
धर्म के नाम पर।
मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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