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स्वतंत्रता की मुस्कान

कविता के माध्यम से हमारे प्यारे देश वासियों को 15 अगस्त स्वतंत्रता दिवस के बारे में बताया गया है।

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स्वतंत्रता की मुस्कान

दो सौ वर्षों की गुलामी के बाद,
हमारा भारत देश हुआ आजाद।
गांधी – भगतसिंह थे जैसे वीर,
कोई था गरीब कोई था अमीर।
देश की आजादी के लिए भारतीय हुए कुर्बान,
बड़ी शिद्दत से मिली है, स्वतंत्रता की मुस्कान।

अंग्रेजी अधिकारीयों की तानाशाही,
हिन्दुस्तान पर जुल्म का कहर ढाई।
चारों तरफ था अन्याय – अत्याचार,
हिंसा से करते गोरे हुकूमत का प्रचार।
देश की आजादी के लिए लोगों ने दी बलिदान।
बड़ी शिद्दत से मिली है, स्वतंत्रता की मुस्कान।

लक्ष्मीबाई- दुर्गावती जैसी नारी – शक्ति,
लोगों को सिखाया देश-प्रेम की भक्ति।
सुभाषचंद्र बोस चंद्रशेखर की ऐसी थी कहानी,
नाम सुनकर कांपते अंग्रेज और मांगते थे पानी।
आजादी के लिए लाचार था भारत का इंसान,
बड़ी शिद्दत से मिली है, स्वतंत्रता की मुस्कान।

संघर्ष को आगे बढ़ाए स्वतंत्रता – सेनानी,
हो गए शहीद लेकिन कभी हार न मानी।
मंगल पांडे खुदीराम बोस का था श्रेष्ठ योगदान,
बड़ी शिद्दत से मिली है, स्वतंत्रता की मुस्कान।

संघर्ष – बलिदान है आजादी का सूत्र,
कई स्त्रियों ने गंँवाई वीर भाई – पुत्र।
हमें आजादी मिली है कई संघर्षों के बाद,
मेरे देश वासियों इसे रखना तुम आबाद।
सभी महापुरुषों का मैं करूं सहृदय गुणगान,
बड़ी शिद्दत से मिली है, स्वतंत्रता की मुस्कान।

15 अगस्त को लहराओ शान से तिरंगा,
न करो हिन्दुस्तान में धार्मिक द्वेष – दंगा।
हिन्दू-मुस्लिम और सिख – ईसाई,
हम आपस में हैं सब भाई – भाई।
परोपकार से तुम भी बनालो अपनी पहचान,
बड़ी शिद्दत से मिली है, स्वतंत्रता की मुस्कान।

—– अकिल खान, जिला – रायगढ़ (छ.ग.) पिन – 496440.

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2 Comments
  1. Jitendra Kumar says

    Very nice Khan sir 👍

  2. Vijay sahu says

    जबरजस्त भाई