KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR
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समसामयिक रचना

जनता राजा-मनीभाई नवरत्न

(1) लोकतंत्र क्या है? स्वतंत्रता का पर्याय । जहाँ होती है जनता राजा, और चलती है उसके बनाये गये कानून ।…

वाह रे कोरोना

कविता - वाह रे , कोरोना ! ...... वाह रे , कोरोना ! तूने तो गजब कर डाला , छोटी सोच और अहंकार को , तूने…

भीड़ में जुटे लोग

भीड़ में जुटे लोग -16.04.2020 --------------------------------/ ये उन लोगों की बातें हैं जो लॉकडाउन,कर्फ़्यू,…

कोरोना चालीसा

??जय श्री राम? सादर वन्दन??? एक प्रयास *कोरोना चालीसा* लिखने का..... सादर समीक्षार्थ प्रस्तुत......…

कोरोना की मार

*कोरोना की मार* गाँव गली सुनसान पड़े हैं। शहर भी तो वीरान पड़े हैं। कोरोना का कहर, आदमी को नाच नचा रहा।…
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