KAVITA BAHAR
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~कुण्डलियाँ

कुंडलियाँ दोहा और रोला के संयोग से बना छंद है। इस छंद के ६ चरण होते हैं तथा प्रत्येक चरण में २४ मात्राएँ होती है। कुंडलियाँ छंद में दूसरे चरण का उत्तरार्ध तीसरे चरण का पूर्वार्ध होता है।

Kundaliyas are verses composed of a combination of Doha and Rolla. This stanza has 4 stages and each phase has 24 volumes. In the Kundaliya verse, the second half of the second phase is the first half of the third phase.

भाई पर कुण्डलिया छंद

साहित रा सिँणगार १०० के सौजन्य से 17 जून 2022 शुक्रवार को पटल पर संपादक आ. मदनसिंह शेखावत जी के द्वारा विषय- भाई पर कुण्डलिया में रचना आमंत्रित किया गया. कुंडलियां विधान- एक दोहा + एक रोला छंददोहा -विषम चरण १३ मात्रा चरणांत २१२सम चरण ११ मात्रा चरणांत २१समचरण सम तुकांत होरोला - विषम चरण - ११ मात्रा चरणांत २१सम चरण - १३ मात्रा चरणांत २२ …
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राजस्थान दिवस कविता – बाताँ राजस्थान री

राजस्थान दिवस कविता : प्रत्येक वर्ष 30 मार्च को हम राजस्थान की अमर गाथा का अपनी सुनहरी यादों में समरण कर इसे राजस्थान दिवस के रूप में मानते है। देश के लिए सर्वस्व न्योछावर करने की परम्परा आज भी राजस्थान में कायम है। 30 मार्च, 1949 को जोधपुर, जयपुर, जैसलमेर और बीकानेर रियासतों का विलय होकर वृहत्तर राजस्थान संघ बना था। इसी तिथि को राजस्थान की…
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होली पर्व -कुण्डलियाँ

होली पर्व - कुण्डलियाँ होली के इस पर्व पर, मेटे सब मतभेद।भूल गिला शिकवा सभी, खूब जताये खेद।खूब जताये खेद, शिकायत रह क्यों पाये।आपस मे रह प्रेम, उसे भूले कब जाये।मदन कहै समझाय,खुशी की भर दे झोली।जीवन हो मद मस्त, प्यार की खेलें होली।। मदन सिंह शेखावत ढोढसर
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रिश्ते नाते (कुण्डलिया )- माधुरी डडसेना

रिश्ते नाते (कुण्डलिया )- माधुरी डडसेना नाते गढ़ने के लिए , रचने पड़ते स्वांग ।बार बार हैं जाँचते , कहता क्या पंचांग ।।कहता क्या पंचाग , बनी उत्सुकता भारी ।करते तिकड़म सर्व , कठिन करते तैयारी ।।मुदिता भर मुस्कान , शून्य फल लेकर आते ।कभी कहीं बन मीत , निभाते अपने नाते ।।नाते देखे हैं बहुत , भरा कूट कर स्वार्थ ।हुआ महाभारत यहाँ , कृष्ण कहे सुन पार्थ…
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हिन्दी कुण्डलियाँ: ऊर्जा संरक्षण

हिन्दी कुण्डलियाँ: ऊर्जा संरक्षण (1)ऊर्जा सदा बचाइये,सीमित यह भंडार।धरती का वरदान है,जग विकासआधार।जग विकास आधार ,समझ कर इसे खरचना।बढ़े नहीं यह और ,सोचकर सभी बरतना।गीता सुन यह बात,चले सब दिन कल-पुर्जा।होगा संभव तभी,रहे जब रक्षित ऊर्जा।। (2)सूरज ऊर्जा पुंज है,इसका हो उपभोग।ऊर्जा संरक्षण करें,ले इसका सहयोग।।ले इसका सहयोग,चलायें सब कल…
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हिन्दी कुंडलिया: घायल विषय

हिन्दी कुंडलिया: घायल विषय घायल रिपु रण में मिले , शरणार्थी है जान ।प्राण बचाने शत्रु का, नीर कराओ पान।नीर कराओ पान, सीख मानवता लेकर।भेदभाव को त्याग, प्रेम का परिचय देकर।कहे पर्वणी दीन, शत्रु फिर होंगे कायल ।समर भूमि में देख , करें सब सेवा घायल।। घायल करते कटु वचन, हृदय बढ़ाते पीर ।शब्द बाण हैं भेदते, जैसे कांँटा तीर।जैसे कांँटा तीर, देह को…
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हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय

हिन्दी कुंडलियां : सरगम विषय सरगम है जानो सदा, सप्तसुरों का साज।पाकर स्वर संगीत को , मिले नयी परवाज ।मिले नयी परवाज, साधना सप्त सुरों में।करें शारदा वास, हमारे ही अधरों में ।कहे पर्वणी दीन, बने स्वर नाद विहंगम ।अद्भुत संगम गीत, सजे मधुरिम है सरगम।। सरगम के जब सुर छिड़े, जीवन मधुबन मान।अंतः उर के वाटिका ,खिले सुमन है जान।खिले सुमन है जान,…
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उत्सव यह गणतंत्र का

उत्सव यह गणतंत्र का उत्सव यह गणतंत्र का , राष्ट्र मनाये आज ।जनमानस हर्षित सकल , खुशी भरे अंदाज ।।खुशी भरे अंदाज , गगनभेदी स्वर गाते ।भारत भूमि महान , प्रणामी भाव दिखाते ।।कह ननकी कवि तुच्छ , असंभव सारे संभव ।।लालकिले से गाँव , सभी पर होते उत्सव ।। उत्सव में उत्साह का , दिखता प्यारा रंग ।तन मन की संलग्नता , दुनिया होती दंग ।।दुनिया होती दंग ,…
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आजा अब परदेशिया

आजा अब परदेशिया आजा अब परदेशिया , तरस रहे हैं नैन ।बाट जोहती हूँ खड़ी , पल भर खोजूँ चैन ।।पल भर खोजूँ चैन , लगे जग सारा सूना ।सावन भादो मास , अश्रु अब बढ़ते दूना ।।कह ननकी कवि तुच्छ , झलक अपना दिखला जा ।मिलन करो मनमीत , शीघ्रता से घर आजा ।। आजा मेरे गाँव में , न्यौता देता आज ।बागीचे हैं प्यार के , बजे यहाँ शुभ साज ।।बजे यहाँ शुभ साज , शांति…
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मदिरा मंंदिर एक सा- रामनाथ साहू ” ननकी “

मदिरा मंंदिर एक सा मदिरा का पर्याय है , माधव मोहन प्यार ।कभी कहीं उतरे नहीं , छके भरे रससार ।।छके भरे रससार , प्रेमरस पीले पगले ।क्या जाने कल वक्त , मिले या आगे अगले ।।कह ननकी कवि तुच्छ , पिया था जिसे कबिरा ।मदिरालय मन मस्त , पिये जा माधव मदिरा ।।मदिरा पीकर कह दिया , उसने सच्ची बात ।मौन खड़े हैं अब सभी , नैन अश्रु बरसात ।। नैन अश्रु बरसात , दर्द…
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