KAVITA BAHAR
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प्रेम आधारित रचना

जरा हमें बता दो जानेमन -मनीभाई नवरत्न

जब-जब होता है प्रथम मिलन. चित्त विचलित हो जाता सजन . ऐसे में करें क्या हम जतन जरा हमें बता दो जानेमन । तन में जोर नहीं ,विक्षिप्त मन। दिल होता है,…

मैं गलतियों पे गलती करता हूं -मनीभाई नवरत्न

मैं गलतियों पे गलती करता हूं । फिर चुपके से , छुपके आहें भरता हूंँ। ये क्या हो जाता मुझे? समझ में ना आता मुझे? ना जाने मैं क्यों ? ऐसा करता हूँ।…

मैं बादल हूं ,तू मेरी सरिता है- मनीभाई नवरत्न

मैं बादल हूं तू मेरी सरिता है मैं शायर हूं तू मेरी कविता है। मेरा खुदा है तू सबसे जुदा है तू मेरा कुरान कलमा तू ही मेरी गीता है। तेरी सूरत है ,…