KAVITA BAHAR
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व्यक्तित्व विषयक रचना

कविता:भीम बाबा

तांटक छंद - भीम बाबा ★★★★★★★★★★★ दुख दर्दो को झेल जनम भर, निर्धनता के मारे थे। बाबा अपने निज कर्मो से, इस जग में…

पृथ्वीराज चौहान

👁👁👁👁👁👁👁👁👁👁👁 ~~~~~~~~~~~~~~बाबूलालशर्मा *विज्ञ* . 🦈 *दोहा छंद* 🦈 . 👁 *पृथ्वीराज चौहान*…

महामानव को नमन्

स्वरचित कविता.... महामानव को नमन् ........................................................... जीवनभर समानता के…

हम तेरे हैं  ऋणी (hum tere hai rini)

तुम-सा वीर विद्वान पाके, भारत है धनी।हे भारत विधि विधाता! हम तेरे  हैं ऋणी।घनघोर निरक्षरता की अंधेरा था काल बना…