KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

तम्बाकू एक भूरा जहर-अशोक शर्मा

12 1,868

तम्बाकू एक भूरा जहर-अशोक शर्मा


आया प्रचलन अमेरिका से,
दुनिया में बोया जाता है।
आर्यावर्त में नंबर दूसरे पर,
यह पाया जाता है।
हो जाती है सुगंध की कमी,
जब यज्ञ पूजा में,
तंबाकू ताजगी खातिर ,
तब सुलगाया जाता है।।

मगर देखो कैसा रूप ,
धारण कर लिया इसने।
तम्बाकू सुर्ती खैनी का बिजनेस,
कर लिया जिसने।
धरा पर रूप धारण करके,
चूरन बनकर आया।
मुखों में हम सबके घाव,
कैंसर कर दिया इसने।।

बीड़ी सिगरेट जैसा उपयोग, इसका धूम्रपानों में।
धुँआ बन जहर भरता है,
यह तो आसमानों में।
तम्बाकू हुक्का चिलम की ,
आदत बनकर देखो।
लगाता आग सीने में,
श्वशन के कारमानों में।।

लिखा हर पैक पर होता ,
तम्बाकू जानलेवा है।
फिर भी हम खाते हैं इसको,
जैसे सुंदर सा मेवा है।
समझ आता नहीं हमको,
मेधा चकरा सी जाती है।
जानलेवा बिके थैली में,
तो यह कैसी सेवा है।।

धारा बर्बादी की बह रही ,
उसको मोड़ना होगा।
नासमझी की कड़ियों को,
मिलकर तोड़ना होगा।
गर रहना है स्वस्थ ,
जीना है दीर्घ जीवन तो।
इस भूरे जहर को ,
अब तो छोड़ना होगा।।



अशोक शर्मा 20.05.21

Show Comments (12)