तम्बाकू सेवन छोड़ो ( विशाल श्रीवास्तव)

3 217

तम्बाकू सेवन छोड़ो ( विशाल श्रीवास्तव)


तम्बाकू सेवन में,
क्यूँ इतनें मग्न हुए?
हुआ नशा से नाश,
नाश से नग्न हुए.
तम्बाकू सेवन ने छीना,
ईश्वर आशीर्वाद.
तम्बाकू सेवन से ही,
जीवन हुआ बर्बाद.
ऐसे बुरे नशे से,
मुंह अपना मोड़ो.
तम्बाकू सेवन छोड़ो,
तम्बाकू सेवन छोड़ो.



तम्बाकू ने छीनीं जानें,
इतने हम फिर हुए बिवस.
तम्बाकू छोड़ो सब,
है तम्बाकू निषेध दिवस.
तम्बाकू ही भयंकर,
मौत का जाल है.
तम्बाकू सेवन छोड़ो,
ये भयंकर काल है.
ऐसे बुरे नशे से,
मुंह अपना मोड़ो.
तम्बाकू सेवन छोड़ो,
तम्बाकू सेवन छोड़ो.



तम्बाकू से पुत्र गए,
और किसी के गए पिता.
तम्बाकू सेवन से,
जवानी में जली चिता.
नारियों अब तुम भी,
तम्बाकू सेवन छोड़ दो.
तम्बाकू सेवन इस धरा से,
सिर सहित अब फोड़ दो.
ऐसे बुरे नशे से,
मुंह अपना मोड़ो.
तम्बाकू सेवन छोड़ो,
तम्बाकू सेवन छोड़ो.


कवि विशाल श्रीवास्तव
जलालपुर, फर्रुखाबाद

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.

3 Comments
  1. DEEPAK KUMAR SHRIVASTAV says

    Bahut Sundar Kavita

  2. Kuldeep says

    Very Motivative Poem.

  3. सूरजपाल says

    बहुत सुन्दर