KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

तिमिर पथगामी तुम बनो न – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस कविता में जीवन को एक दिशा देने की कोशिश की गयी है |
तिमिर पथगामी तुम बनो न – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

0 159

तिमिर पथगामी तुम बनो न – कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न
अहंकार पथ तुम चरण धरो न
लालसा में तुम उलझो न
तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न

अंधकार में तुम झांको न
अनल मार्ग तुम धरो न
निशिचर बन तुम जियो न
कुटिल विचार तुम मन धरो न
तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न

कल्पवृक्ष बन तुम जीवन जीना
शशांक सा तुम शीतल होना
अमृत सी तुम वाणी रखना
अम्बर सा तुम विशाल बनो न
तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न

किंचिन सा भी तुम डरो न
घबराहट को मन में तुम पालो न
क्लेश वेदना सब त्यागो तुम
पुष्कर सा तुम पावन होना
तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न

द्रव्य वासना तुम उलझो न
दुर्जन सा तुम हठ पालो न
सुरसरि सा तुम्हारा जीवन हो
पावन निर्मल मार्ग बनो तुम
चीर तिमिर प्रकाश बनो तुम
अलंकार उत्कर्ष बनो तुम
तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न
तिमिर पथगामी तुम बनो न
कानन जीवन तुम भटको न

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.