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राष्ट्रीय पर्व पर कविता

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राष्ट्रीय पर्व पर कविता

तीन रंगों का मैं रखवाला खुशहाल भारत देश हो।
मेरी भावनाओं को सब समझें ऐसा यह सन्देश हो।

जब-जब होता छलनी मेरा सीना मैं भी अनवरत रोता हूँ ।
मेरे दिल की तो समझो मैं भी कातर और ग़मज़दा होता हूँ।
सब के मन को निर्मल कर दो प्यार का समावेश हो।
मेरी भावनाओं को सब समझें मेरा यह सन्देश हो।
तीन रंगों का मैं ….

जब मेरी खातिर लड़ते-लड़ते मेरे सपूत शहीद हो जाते हैं |
मेरी ही गोद में सिमटकर वे सब मेरे ही गले लग जाते हैं।
बोझिल मन से ही सही उन्हें सहलाऊँ ऐसा मेरा साहस हो।
मेरी भावनाओं को सब समझें मेरा यह सन्देश हो।
तीन रंगों का मैं ….

जाकर उस माता से पूछो जिसने अपना लाल गँवाया है।
निर्जीव देह देखकर कहती  मैंने एक और क्यों न जाया है |
तेरे जैसी वीरांगनाओं से ही देश का उन्नत भाल हो।
मेरी भावनाओं को सब समझें मेरा यह सन्देश हो।
तीन रंगों का मैं ….

मेरे प्यारे देश को शूरवीरों की आवश्यकता, अनवरत रहती है ।
उन प्रहरियों की सजगता के  कारण ही, सुरक्षित रहती धरती है ।
आ तुझे गले लगाऊँ, तुझ पर अर्पण सकल आशीर्वाद हों ।
मेरी भावनाओं को सब समझें मेरा यह सन्देश हो।
तीन रंगों का मैं ….

मैं भी सोचा करता हूँ पर इस व्यथा को किसे सुनाऊँ मैं।
छलनी होता मेरा सीना अपनी यह पीड़ा किसे दिखाऊँ मैं।
देश की खातिर देह उत्सर्ग हो यही सबका अंतिम  प्रण हो।
मेरी भावनाओं को सब समझें मेरा यह सन्देश हो।
तीन रंगों का मैं ….

श्रीमती वैष्णो खत्री
(मध्य प्रदेश)
मोबाइल no. 9926756800
कविता बहार से जुड़ने के लिये धन्यवाद

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