बाल कविता

तितली पर बाल कविता

तितली पर बाल कविता

नीली पीली काली तितली।
सुंदर पंखों वाली तितली।।

आए-जाए फूलों पर ये,
घूमे डाली-डाली तितली।।

कुदरत ने कितने रंग भरे,
लाड-चाव से पाली तितली।।

फूल-फूल पर आती जाती,
रहती है कब खाली तितली।।

सब को खुशियां देने वाली,
ऐसी है मतवाली तितली।।

छूने से ये डर जाती है,
नाजो-नखरे वाली तितली।

-विनोद सिल्ला

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1 thought on “तितली पर बाल कविता”

  1. // इस दुनिया में नित नई कहानी //

    पंच तत्व की देह सुरीली इच्छाओ की छुई मुई
    गीली लकड़ी सुलगे जैसे ऐसे काया जलती है
    धुंआ उमड़ता भीतर ही भीतर
    इस दुनिया में नित नई कहानी ।

    मेरा किसी से नही है शिकवा गिला
    क्या करें और क्या नही,इसे जानना होगा
    ये दुनिया है, आंसुओं की झील पीर कैसे बुझेंगी
    दर्द की तो तह पे तहें है इस दुनिया में नित नई कहानी ।

    क्या होंगा अंजाम इसका कोई नही कर पाता है अनुमान
    अंधेरा दूर कर अपने मन का खड़ी हो जा अपने पैरों पर

    तेरी किस्मत तेरे ही हाथों में है
    इस दुनिया में नित नई कहानी ।

    परेशानियां, दुःख और तकलीफें
    न जाने जीवन में,कब आ जायेगी
    काम बड़े धीरज का है
    मन का ज्ञान जरूरी है ।

    मंजिल किस आकाश में है
    मत सोचें फिलहाल
    धुआं उमड़ता भीतर ही भीतर
    इस दुनिया में नित नई कहानी ।

    शिवकुमार बर्मन

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