KAVITA BAHAR
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तुम ही हो माता पिता तुम्ही हो

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तुम ही हो माता पिता तुम्ही हो

sarv-dharm-prarthna
sarv-dharm-prarthna

तुम ही हो माता पिता तुम्ही हो

तुम ही बंधू , सखा तुम्ही हो

तुम्ही हो साथी तुम ही सहारे

कोई न अपना सिवाए तुम्हारे

तुम्ही हो नैया तुम्ही खिवैया

तुम ही हो बंधू सखा तुम्ही हो …

जो खिल सके न वो फूल हम हैं

तुम्हारे चरणों की धुल हम हैं

दया की दृष्टि सदा ही रखना

तुम ही हो बंधू सखा तुम ही हो…

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