KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

तुम्हारी यही बातें मुझे अच्छी लगतीं हैं

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तुम्हारी यही बातें मुझे अच्छी लगतीं हैं

तुम्हारी यही बातें मुझे अच्छी लगतीं हैं
गुज़रे यादों में जो रातें मुझे अच्छी लगतीं हैं


तुम्हें न देखूँ तो दिल को न मेरे चैन मिलता है
छुप छुप के मुलाकातें मुझे अच्छी लगतीं हैं
दिल में दबा के रखते हो तुम जिन अरमानो को
वो छुपी छुपी तेरी चाहतें मुझे अच्छी लगतीं हैं


सुना है प्यार करने वाले हिम्मत वाले होते हैं
ये रंज और ये आफतें मुझे अच्छी लगतीं हैं
तुम ये रोज़ लिख लिख कर जो मुझको भेजते हो
ये ख़त में प्रेम सौगातें मुझे अच्छी लगतीं हैं

निशां उल्फ़त का दामन से सुनो रह रह के जाता है
चुनरिया तुम जो रंग जाते मुझे अच्छी लगतीं हैं
तेरी ‘चाहत’ है वो ख़ुशबू बिखरी मेरे तन मन पे
निगाहों की करामातें मुझे अच्छी लगतीं हैं


नेहा चाचरा बहल ‘चाहत’
झाँसी

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