KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

उम्मीद के दिये पर कविता-मनोज बाथरे

0 424

उम्मीद के दिये पर कविता

अपनेपन में
खोये हुए
हम खोजते हैं
उम्मीद के दिये
जो हमें
आशारूपी
उजाले
के साथ हमें
एक नई रोशनी
दे सकें
अपने सुखद
जीवन के लिए

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.