KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

कैमरे पर कविता

0 140

कैमरे पर कविता

वे रहते हैं ब्लैकआउट कमरों में
वे हमें देखकर चलते है दांव
बंद होते हैं उनके दरवाज़े और किवाड़
हर बार हमारे साथ होता है खिलवाड़

हम देख नहीं पाते
कोई भी उनकी कारगुजारियां
कोई भी चालाकियां….

अब गए वो ज़माने
जब दीवारों के भी कान होते थे।

— नरेन्द्र कुमार कुलमित्र
9755852479

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.