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उसने देखा जीवन बदल देने का सपना- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

इस कविता के माध्यम से कवि जीवन को बदल देने और दिशा देने का प्रयास कर रहा है ।
उसने देखा जीवन बदल देने का सपना- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

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उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

निर्जन कानन को हरियाली में बदल देने का

पीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही कुरीतियों को कुचल देने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उदास आँखों में आशा का दीपक जलाने का

खुद का खुद से परिचय कराने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

भीतर की टीस से दुनिया को मिलाने का

खुद पर खुद का विश्वास जगाने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

क्यूं कर हो मेरी नींद पर किसी और का हक

यादों की विरासत से कुछ पल चुराने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

क्यूं कर हो मेरी साँसों पर किसी और का हक

खुद पर खुद का हक जताने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

जिन्दगी की किताब पर जमी धूल मिटाने का

जिन्दगी के हर पल को खुशनुमा बनाने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

आह जिन्दगी को अहा जिन्दगी में परिवर्तित करने का

हवाओं में बसे सुर से गीत सजाने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

पिंजरे के पंछी को आसमां की सैर कराने का

अवसर और उम्मीदों का एक कारवाँ सजाने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

अज्ञानता के पालने में झूल रहे लोगों को जगाने का

सिसकती साँसों के साथ जी रहे लोगों को हंसाने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

प्रेम और करुणा की कसौटी पर खरा उतरने का

जीवन को जीवन पथ पर अग्रसर कर देने का

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

उसने देखा जीवन बदल देने का सपना

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