उसके नखरे सहे हजार

कविता वेलेंटाइन डे प्रतियोगिता में हिस्सा लेने हेतु।

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उसके नखरे सहे हजार

वह खुश रहती मेरे साथ,
और करती है मुझसे बात।
उसके लिए मैं प्यारा,
मुझको वो प्यारी।
उसकी सूरत इस ,
संसार में सबसे न्यारी।
आज वो करने लगी,
मुझसे जान से ज्यादा प्यार।
क्योंकि मैंने ही अकेले,
उसके नखरे सहे हजार।

मेरे लिए वो सजती-संवरती,
फिर मेरे करीब आती है।
धीरे से मेरे अधरों पर,
चुम्बन वो कर जाती है।
आज भी मेरे लिए वो,
होकर आती है तैयार।
क्योंकि मैंने ही अकेले,
उसके नखरे सहे हजार।।

कवि विशाल श्रीवास्तव फर्रूखाबादी।

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