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उत्सव यह गणतंत्र का

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उत्सव यह गणतंत्र का

उत्सव यह गणतंत्र का , राष्ट्र मनाये आज ।
जनमानस हर्षित सकल , खुशी भरे अंदाज ।।
खुशी भरे अंदाज , गगनभेदी स्वर गाते ।
भारत भूमि महान , प्रणामी भाव दिखाते ।।
कह ननकी कवि तुच्छ , असंभव सारे संभव ।।
लालकिले से गाँव , सभी पर होते उत्सव ।।

उत्सव में उत्साह का , दिखता प्यारा रंग ।
तन मन की संलग्नता , दुनिया होती दंग ।।
दुनिया होती दंग , किये हम काम अजूबे ।
भारत बना अनूप , प्रेम के छंदस डूबे ।।
कह ननकी कवि तुच्छ , सभी जन के अधरासव ।
रंगबिरंगे दृश्य , बने अब प्यारे उत्सव ।।

उत्सव के दिन आज है, गाओ मंगल गान ।
जल थल अरु आकाश में , उड़े तिरंगा शान ।।
उड़े तिरंगा शान , मोद से हर्षित सारे ।
सजे धजे सब लोग , आज हैं अतिशय प्यारे ।।
कह ननकी कवि तुच्छ , सभी सुख होते उद्भव ।
झूमे धरती आज , मनाते है सब उत्सव ।।

रामनाथ साहू " ननकी "

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