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वीर नारायण सिंह माटी के शान

देस बर अजादी, नइ रिहिस असान ।
वीरमन लड़ीन अउ, हाेगिन बलिदान ।
सबोदिन हे अगुआ म छत्तीसगढ़िया ।
वीर नारायण सिंह ह, इ माटी के शान।

इक बेला राज म, महा दुकाल छाइस।
दुख पीरा घेरिस अउ सबला तड़पाइस।
कइसे देखे भुखमरी हमर वीर सहासी।
माखन ल लूटिस, फेर अनाज बटादिस।

आंदोलन के बात म अगुआ रइथे वीर।
सेना बनाइस अंग्रेज बर, जेल ला चीर।
नारायण तोर चरन वंदन धन्न धन्न  वीर।
देस खातिर लुटा दय तै,अपन के सरीर ।

दाई बबा के गुन ह मिल जाथे सौगात म।
देस परेम जिम्मेदारी, सौपे जाथे हाथ म। 
हे सियानहा! धन्नबाद हे तोर जुझारूपना
जेल म सपथ लेय ,भगाना अंग्रेजी सेना।

रजधानी मांझा म,  जय स्तंभ देथे सुरता।
कमती होही बखान ह नई होवे जी पूरता।
हे सोनाखनिहा! अंग्रेज ल लगाय लगाम।
आदिवासी बिंझवार ! तोला मोर प्रणाम।

🖊️मनीभाई नवरत्न

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