KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

विनाशकारी तंबाकू- महदीप जंघेल (विश्व तंबाकू निषेध दिवस कविता)

तंबाकू छोड़ो ,जिंदगी से नाता जोड़ो।

6 247

विनाशकारी तंबाकू- महदीप जंघेल (विश्व तंबाकू निषेध दिवस कविता)


तंबाकू पान गुटका शराब ,
तन मन को करे पूरा खराब।
रोगों से जूझते उम्र भर लोग,
परिवार को करे पूरा बर्बाद।



खाने वाले कहते है ,
तंबाकू से आता बड़ा मजा।
कैंसर जैसे घातक रोगों से घिरकर,
मिलता भयंकर कड़ा सजा।



तंबाकू का नशा न जाने,
निगल गया कितने घर बार।
तन मन जीवन नष्ट करके,
फूंक दिए घर -घर में आग।


तंबाकू गुटका खैनी, न जाने,
कितने बीमारियों को बुलाता है?
फेफड़े को जलाकर, न जाने,
कितनो को सुलाता है?



तंबाकू के सेवन करने से ,
पूरा तन मन जलता है।
जिंदगी तबाह करने के लिए,
न जाने ये क्यों बनता है?



तंबाकू के सेवन करने में,
कितने घर हो गए बर्बाद ?
उत्पादक और विक्रेता,देखो
कितने हो गए आबाद?



तंबाकू को मत खाना ,कभी
तबाही को मत बुलाना कभी।
नशा नाश का जड़ है यारो,
परिवार को मत रुलाना कभी।



जीवन रूपी सागर में,
नशा का जहर मत घोलो।
अनुपम और अनमोल जीवन को,
नशा के दलदल में मत धकेलो।



तंबाकू खाना छोडोगे, तो
दांत भी मोती-सा चमकेंगे।
तन मन स्वस्थ रहेगा हरपल,
चेहरा भी चंदा-सा दमकेंगे।



तंबाकू,गुटका,सिगरेट,शराब से,
न जाने, कितने परिवार जला है?
तंबाकू सेवन से अब तक यारो,
किसका हुआ भला है?



रचना- महदीप जंघेल
निवास- खमतराई,खैरागढ़
जिला – राजनांदगांव(छ.ग)

Leave A Reply

Your email address will not be published.

6 Comments
  1. Mahdeep says

    आप सभी का धन्यवाद

  2. Mahdeep says

    धन्यवाद,ऐसे ही प्रोत्साहित करते रहिए।

  3. Sameer soni says

    बहुत ही अच्छी रचना महदीप भैया

  4. Rina says

    very nice

  5. Priyanka janghel says

    Bhut badhiya bhaiya aise hi aap aage bdhe yhi kamna hai hmari

  6. पद्मा साहू says

    उत्कृष्ट सृजन सर जी 🙏🙏