Join Our Community

Publish Your Poems

CLICK & SUPPORT

विश्व एड्स दिवस की कविता

0 179

विश्व एड्स दिवस की कविता

CLICK & SUPPORT


मानव रखना ज्ञान को,एडस घातक रोग।
यौन रोग कहते इसे,फँसते इसमें लोग।।
फँसते इसमें लोग,एचआईवी कहते।
जननांगों में घाव,गले में सूजन रहते।।
ज्वर आते हैं देह,लगा बढ़ने यह दानव।
रोको इसकी वृद्धि,सावधानी से मानव।।

राजकिशोर धिरही
छत्तीसगढ़

Leave A Reply

Your email address will not be published.