KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

कविता बहार बाल मंच ज्वाइन करें @ WhatsApp

@ Telegram @ WhatsApp @ Facebook @ Twitter @ Youtube

नशा पर कविता- नशा शराबी जब तजे करे जगत सत्कार-रमा

0 508

नशा पर कविता

देख शराबी की दशा,
नशा करे मदमस्त।
अपने तन की सुध नहीं,
करता जीवन ध्वस्त।।

नित्य शराबी मद्य का,
करता है रसपान।
लोग सदा निंदा करें,
पाता जग अपमान।।

पत्नी बच्चे हैं दुखी,
देख शराबी चाल।
नोंक झोंक घर में चले,
मचता अजब धमाल।।

नशा शराबी के लिए,
श्रेष्ठ पेय है जान।
उसके लत में डूबकर,
खुद को कहे महान।।

मन माने सब पी रहे,
जग शराब भरमार।
नशा शराबी जब तजे,
करे जगत सत्कार।।



~ मनोरमा चन्द्रा “रमा”
रायपुर (छ.ग.)

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.