KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

Register/पंजीयन करें

Login/लॉग इन करें

User Profile/प्रोफाइल देखें

Join Competition/प्रतियोगिता में हिस्सा लें

Publish Your Poems/रचना प्रकाशित करें

User Profile

वह मां है – जतीन चारण की सुन्दर कविता

0 3,330

वह मां है – जतीन चारण की सुन्दर कविता

जब चोट हमें लगे तो आंखें उसकी भर जाती है,
जब आगे हम बढें तो हंसी उसके चेहरे पर छाती है…..

हर घड़ी वह हमारे साथ रहना चाहती है;
वह मां है तेरी बस तेरे पास रहना चाहती है।

हमको एक इंसान माँ ही तो बनाती है,
इस संसार में लाकर यह संसार हमें माँ ही तो दिखाती है….

बाकी सभी तो अपना कह कर दूर हो जाते हैं

बस एक माँ ही तो है जो हमें गले लगाती है:

और कुछ नहीं बस वह तेरा साथ ही तो चाहती है,
बुढ़ापे में तू बन जा उनका सहारा
बस वो यह बात ही तो चाहती है।

कभी मौका मिले माँ की सेवा करने का
तो पीछे मत हटना मेरे दोस्त,
क्योंकि नसीब वालों को ही यह नसीब होता है…

और मां की कीमत उनसे पूछ लेना,
जिनको माँ का साया तक नसीब नहीं होता है।

मैंने वक्त को गुजरते देखा है….
बहुतों को बदलते देखा है
और बहुतों की जिंदगी में,
मां की कमी को खलते देखा है।

जतीन चारण

You might also like
Leave A Reply

Your email address will not be published.