KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

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वह स्त्री है( स्त्री आधारित कविता)

इस कविता में स्त्री के विविध रूपों में उसकी विविध शक्तियों को दर्शाया गया है। जो यथार्थ जीवन से जुड़ी हुई हैं।

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वह स्त्री है( स्त्री आधारित कविता)

वह स्त्री है,
वह शक्ति है।
वह जो सीता है,
चौदह वर्ष तक बंधनों में निर्भीक, आशान्वित,
घोर दुखों में भी सम,
पति की विरह में भी स्थिर
और इस सब के बाद भी परीक्षा!
अग्नि की तीव्र लपटों में भी,
उसमें सहनशक्ति है,
वह स्त्री है।

वह जो बाई लक्ष्मी है,
मातृभूमि हेतु समर्पित,
शैतानी अट्टहास के सम्मुख गर्व से उठा ललाट,
दासता के प्रस्ताव के विरुद्ध रक्तरंजित नेत्र,
विशाल शत्रु दल के सम्मुख चमकता खड़ग,
चहुं ओर के प्रहारों से भी पुत्र की रक्षा,
रणभूमि में रणचंडी बन शवों के अंबार लगाने वाली,
उसमें संहारशक्ति है,
वह स्त्री है।

वह अपाला, मैत्रेयी, लोपामुद्रा है,
विदुषी, गुणवती और शास्त्रधारिणी है,
शास्त्रार्थ में,
ब्रह्मज्ञाता पुरुष को जीतने वाली गार्गी है,
उसमें सरस्वती की ज्ञानशक्ति है,
वह स्त्री है।

वह माँ और पत्नी है,
मृत्यु से लड़कर नवजीवन की जननी है,
संतान में संस्कार की,
पति के भाग्य की,
परिवार के सुख सौहार्द की,
उसमें सृजनशक्ति है,
वह स्त्री है।

वह बहन-बेटी है,
पिता की पगड़ी हेतु पग-पग सजग,
भाई की सफलता हेतु श्रम झोंकती,
समाज के रूढ़िवाद को नकारती,
कुदृष्टि के बाणों को निश्शंकता की ढाल से मर्दित करती,
स्वतंत्रता और परतंत्रता के बीच जूझती,
उसमें संघर्षशक्ति है,
वह स्त्री है।

कवि:- निशान्त कुमार सक्सेना
पता -112, मोहल्ला तहवरगंज, पोस्ट मीरानपुर कटरा, तहसील तिलहर, जिला शाहजहांपुर, उत्तर प्रदेश-242301

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