वक़्त पर हमने अगर ख़ुद को संभाला होता

वक़्त पर हमने अगर ख़ुद को संभाला होता

“एक गज़ल….”

वक़्त पर हमने अगर ख़ुद को संभाला होता
ज़ीस्त में मेरी उजाला ही उजाला होता

दरकते रिश्तों में थोड़ी सी तो नमी होती
अपनी जुबान को जो हमने सम्हाला होता

तुमको भी ख़ौफेे – खुदा यार कहीं तो होता
काश ! रिश्तों को मोहब्बत से संभाला होता

दर- ब -दर ढूंढ़ रहा जिसको बशर पत्थर में
काश ! दिल में भी कहीं एक शिवाला होता

प्यार करने की सजा फिर न मिली होती गर
हमने सिक्का कोई क़िस्मत का उछाला होता

काश ! मालूम ये होता कि नहीं उल्फ़त है
कच्ची मिट्टी को संस्कारों में जो ढाला होता

लोग हँसते खुद पर जो निराले वो, अजय
काश ! इतना ही हसीं दिल भी हमारा होता

….अजय ‘मुस्कान’

(Visited 1,280 times, 1 visits today)

अजय कुमार "मुस्कान "

जन्म तिथि - 12 जनवरी 1972 पिता का नाम - श्री जटा शंकर मिश्र माता का नाम - श्रीमती भगवती मिश्र शिक्षा - डिप्लोमा इन इलेक्ट्रिकल इन्जीनियरिंग रोजगार - टाटा स्टील में कार्यरत पता - 32/ L5, क्रास रोड न0-5, एग्रिको, जमशेदपुर – 831009 ( मूल निवासी : मैथिल काशी नगरी ग्राम - बनगाँव, जिला - सहरसा , बिहार ) साहित्यिक विधा - छंदमुक्त कविता / गज़ल/ हास्य - व्यंग्य लेखन भाषा ज्ञान - हिंदी, मैथिली, अंग्रेजी उपलब्धि - दो संयुक्त प्रकाशित पुस्तकें १) प्यारी बेटियाँ- साहित्यपीडिया पब्लिशिंग २) सृजन गुच्छ ( प्रथम )- समदर्शी प्रकाशन  जमशेदपुर से बाहर कई मंचों पर प्रस्तुति  विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में रचनाओं का प्रकाशन  विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित  तकनिकी क्षेत्र में कई राष्ट्रिय सम्मान

प्रातिक्रिया दे

This Post Has 9 Comments

  1. अजय कुमार "मुस्कान "

    thanks

  2. अजय कुमार "मुस्कान "

    thanks

  3. अजय कुमार "मुस्कान "

    thanks

  4. Anushka Thakur

    Nice

  5. Mikku

    बेहतरीन, क्या लिखते है, वाह

  6. प्रीति

    बेहतरीन, क्या लिखते है, वाह वाह..

  7. भगवती मिश्रा

    वाह वाह, बेहतरीन

  8. ANKUR

    Waah waah..

  9. Anand numar Mishra

    बहुत खूबसूरत, उम्दा