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वतन हमारा है चमन – देश पर दोहे

यहां आदरणीया सुकमोती चौहान रुचि द्वारा रचित देश पर दोहे प्रस्तुत है।

वतन हमारा है चमन – देश पर दोहे

भारत देश तिरंगा झंडा
भारत देश तिरंगा झंडा


वतन हमारा है चमन, भाँति-भाँति के फूल |
रंग रूप सबसे अलग, “जन-गण-मन” है मूल |

उर में बसता हिन्द है, बसे तिरंगा नैन |
जय भारत जय हिन्द की, बसा जीभ पर बैन ||

तीन रंग का ओढ़कर, आज दुशाला यार |
देश प्रेम में डूबकर, करते जय जयकार ||

भारत प्यारा देश है, प्यारे सारे लोग |
जो जैसा है सोचता, वैसा पाता भोग ||

सिक्का चित पट से बना, दोंनो हुए विशेष |
हुए आदमी कुछ बुरे, बुरा नहीं है देश ||


सुकमोती चौहान रुचि
बिछिया, महासमुंद, छ. ग.

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