कविता 30 वो बेबाक कवि है -मनीभाई नवरत्न

कविता 30
वो बेबाक कवि है
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कभी कल्पना की पर लगाये।
कभी भटके को डगर दिखाये।
कभी करें हंसी ठिठोली ,
कभी करें क्रांति की बोली।
वह कोई नहीं
समाज का उगता रवि है ।
हां ! वो बेबाक कवि है ।।
चारण बन,
 राजा का गुणगान किया।
आत्मविश्वास भर,
 चरित बखान किया ।
भक्तिधारा बहा के,
मानव मूल्य संजोया।
काव्य श्रृंगार करके प्रेम बीज बोया।
रंजन किया जग का,
मन में जिसकी छवि है ।
हां ! वो बेबाक कवि है ।।
खादी-कुर्ता,कलम दवात,
कांधे में झोली ।
साहित्य सृजनकर्ता वो,
किताब हमजोली।
गुदगुदाया जी भर के,
कभी संग हमारे रो ली ।
कुरीति दूर करने को ,
सहे ताने की गोली ।
जिसकी रचना कोई खोज ,
हर पुरातन से नवी है ।
हां ! वो बेबाक कवि है ।।

मनीभाई”नवरत्न”

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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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