हिंदी कविता : मैंने खोल दिये हैं, पावों की अनचाहे बेड़ियां (मनीभाई नवरत्न)

अब नहीं रुकूंगी,
नित आगे बढूंगी
मैंने खोल दिए हैं ,
पावों की अनचाहे बेड़ियां।
जो मुझसे टकराए ,
मैं धूल चटाऊंगी
हाथों में डालूंगी ,
उसके अब हथकड़ियां।।
(१)
अब धुल नहीं मैं ,
ना चरणों की दासी।
अब तो शूल बनूंगी
अन्याय से डरूँगी नहीं जरा सी।
क्रांति की ज्वाला हूँ मैं,
समझ ना रंगीनी फुलझड़ियाँ ।।
मैंने खोल दिए हैं ,
पावों की अनचाहे बेड़ियां……
……..
अब नहीं रुकूंगी,
नित आगे बढूंगी ।।
(२)
दूर रही इतने दिनों तक,
अपने वजूद की सदा तलाश थी ।
तेरे फैसले ,विचार मुझ पर थोपे
कभी ना जाना, मुझे क्या प्यास थी ?
अब मौका मिला, बंधन मुक्ति का
ख्वाहिश नहीं अब मोती की लड़ियां ।।
मैंने खोल दिए हैं ,
पावों की अनचाहे बेड़ियां…..
……….
अब नहीं रुकूंगी,
नित आगे बढूंगी ।।
(३)
घर में सजी रही वस्तु बन,
सपनों का गला घोंटा चारदीवारी में ।
पीड़ित हो सामाजिक सरोकार से ,
सती हो गई सिर्फ घरेलू जिम्मेदारी में ।
क्या पहचान नहीं उन्मुक्त गगन में?
किस बात में कम हैं हम लड़कियां?
मैंने खोल दिए हैं ,
पावों की अनचाहे बेड़ियां……
……….
अब नहीं रुकूंगी,
नित आगे बढूंगी ।।

✍मनीभाई”नवरत्न”(मनीलाल पटेल)
(Visited 5 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे