KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

यह ज्योति अखण्ड जलने दो

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यह ज्योति अखण्ड जलने दो


अभी तो मिटे नहीं है निशां,
जो वतन पर कुर्बान हुए।
कर अपनी जो जां निसार,
तकदीर हिंद की बना गए।

कितनी माँओं का आँचल सूना,
बालाओं  का सिंदूर  गया।
छिन गई बुढापे की लकड़ी
नन्हों  का साया चला गया।


इस राष्ट्र प्रेम की धारा को
बहने दो सभी हिन्दवासी
मन्दिर ,मस्जिद अरु गुरुद्वारा
है यही अपना काबा काशी


बलिदान न व्यर्थ जाय उनका
अब हुँकार हिन्द के शेर भरो।
मातृभूमि  की रक्षा  करने को
मिलकर  अरिदल पर  टूट पड़ो।

ऐसे रणबाँकुरे वीरों के
स्वर्णिम इतिहास लिखे जाते।
करती विजयश्री वरण उन्हें
यशगान  सभी उनका गाते।

शहीद समाधि पे सुमन चढा
यह दीप प्रज्वलित कर दो।
राष्ट्रप्रेम  की  अलख जगाने,
यह ज्योति अखण्ड जलने दो।


पुष्पाशर्मा”कुसुम”

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