कविता 41 ये प्यार भी अजीब- मनीभाई नवरत्न

कविता 41
ये प्यार भी अजीब
■■■■■■■■■■■■■■■■■■■■
जमी चलती हुई,
आसमां की राहों में,
ढूंढने अपने साथी को ।
उसे क्या खबर है ?
अपना हमसफर
उसी के करीब हो ।
सारा जग ढूंढा ,
देखे कई सूरज तारे ।
मिले ना कोई उसे ,
जिसपे वो दिल हारे ।
उसे क्या ख़बर  है ?
उसकी चंदा ही
उसी का नसीब हो ।
जमी देखे सूरज को,
जिसके आशिक अनेक हैं।
चंदा देखे जमी को ,
जिसके इश्क नेक है ।
जमीन पे क्या असर है ?
ये प्यार हो भी,
तो अजीब हो ।
जमी चलती हुई,
आसमां की राहों में,
ढूंढने अपने साथी को ।
मनीभाई”नवरत्न”

(Visited 1 times, 1 visits today)

मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

प्रातिक्रिया दे