योग से परिचय

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योग का शाब्दिक अर्थ है जोड़ना।

शारीरिक व्यायाम ,मुद्रा (आसन) को ध्यान (मन) से जोड़ना है इस हेतु सांस लेने की तकनीक को सीखना होता है. शरीर को आत्मा से जोड़ना है और फिर परमात्मा या प्रकृति या ईश्वर से जुड़ना होता है .

  योग, हिंदू दर्शन के षड्दर्शन (छः दर्शन) में से एक है। ये 6 दर्शन –

  • सांख्य,
  • योग,
  • न्याय,
  • वैशेषिक,
  • मीमांसा और
  • वेदान्त। 

पतंजलि ने योग को आठ अंगों (अष्टांग) के रूप में वर्णित किया है।

अष्टांग योग

  • यम (संयम)
  • नियम (पालन),
  • आसन (योग आसन),
  • प्राणायाम (श्वास नियंत्रण),
  • प्रत्याहार (इंद्रियों को वापस लेना),
  • धारणा (एकाग्रता),
  • ध्यान (ध्यान) और
  • समाधि (अवशोषण)। 

यम

महर्षि पतंजलि द्वारा योगसूत्र में वर्णित पाँच यम-

  1. अहिंसा
  2. सत्य
  3. अस्तेय
  4. ब्रह्मचर्य
  5. अपरिग्रह

शान्डिल्य उपनिषद तथा स्वात्माराम द्वारा वर्णित दस यम-

  1. अहिंसा
  2. सत्य
  3. अस्तेय
  4. ब्रह्मचर्य
  5. क्षमा
  6. धृति
  7. दया
  8. आर्जव
  9. मितहार
  10. शौच

नियम

 प्रकृति की तरह मनुष्य को भी व्यवस्थित जीवन जीने के लिए नियमों का पालन करना होता है। जो मनुष्य नियमबद्ध तरीके से जीवन जीता है, उसका जीवन आनंदमयी रहता है, जबकि इसके विपरीत नियमरहित जीवन जीने वाले मनुष्य को एक समय के बाद अपना जीवन भार लगने लगता है। प्रकृति भी जब अपने नियम से हटती है, तब विकराल घटनाएं घटती हैं और विध्वंस होता है। ऐसे में प्रकृति और जीवन दोनों में नियमबद्धता आवश्यक है। 

आसन (योग आसन)

 सुखपूर्वक स्थिरता से बैठने का नाम आसन है। या, जो स्थिर भी हो और सुखदायक अर्थात् आरामदायक भी हो, वह आसन है।

प्राणायाम (श्वास नियंत्रण)

प्राणायाम प्राण अर्थात् साँस आयाम याने दो साँसो मे दूरी बढ़ाना, श्‍वास और नि:श्‍वास की गति को नियंत्रण कर रोकने व निकालने की क्रिया को कहा जाता है।

प्रत्याहार (इंद्रियों को वापस लेना)

प्रत्याहार में ख्याल नहीं रहता है , मन भागता रहता है । बहुत देर के बाद ख्याल आता है कि ध्यान करने के लिए बैठा था , मन कहाँ – कहाँ चला गया, जिसको प्रत्याहार नहीं होगा , उसको धारणा कहाँ से होगी । धारणा ही नहीं होगी , तो ध्यान कहाँ से होगा ? इसीलिए मुस्तैदी से भजन करो । 

धारणा (एकाग्रता)

रणा का अनुवाद “पकड़ना”, “स्थिर रहना”, “एकाग्रता” या “एकल फोकस” के रूप में किया जा सकता है। प्रत्याहार में बाहरी घटनाओं से इंद्रियों को वापस लेना शामिल है। धारणा इसे एकाग्रता  या एकाग्र चित्त में परिष्कृत करके इसे आगे बढ़ाती है .धारणा गहरी एकाग्रता ध्यान का प्रारंभिक चरण है, जहां जिस वस्तु पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है उसे चेतना से विचलित किए बिना मन में रखा जाता है।

ध्यान (ध्यान)

ध्यान करने के लिए स्वच्छ जगह पर स्वच्छ आसन पे बैठकर साधक अपनी आँखे बंध करके अपने मन को दूसरे सभी संकल्प-विकल्पो से हटाकर शांत कर देता है। और ईश्वर, गुरु, मूर्ति, आत्मा, निराकार परब्रह्म या किसी की भी धारणा करके उसमे अपने मन को स्थिर करके उसमें ही लीन हो जाता है। 

ध्यान के अभ्यास के प्रारंभ में मन की अस्थिरता और एक ही स्थान पर एकांत में लंबे समय तक बैठने की अक्षमता जैसी परेशानीयों का सामना करना पड़ता है। निरंतर अभ्यास के बाद मन को स्थिर किया जा सकता है और एक ही आसन में बैठने के अभ्यास से ये समस्या का समाधान हो जाता है। सदाचार, सद्विचार, यम, नियम का पालन और सात्विक भोजन से भी ध्यान में सरलता प्राप्त होती है।

समाधि (अवशोषण)

जब साधक ध्येय वस्तु के ध्यान मे पूरी तरह से डूब जाता है और उसे अपने अस्तित्व का ज्ञान नहीं रहता है तो उसे समाधि कहा जाता है।समाधि के बाद प्रज्ञा का उदय होता है और यही योग का अंतिम लक्ष्य है।

योग के प्रकार  (Yoga Poses) 

अष्टांग योग – अष्टांग योग, तेजी से सांस लेने की प्रक्रिया को जोड़ता है। इसमें मुख्य रूप से 6 मुद्राओं का समन्वय है।  

विक्रम योग – विक्रम योग को हॉट योग (Hot Yoga) के नाम से भी जाना जाता है।

अयंगर योग – इसमें कम्बल, तकिया, कुर्सी और गोल लम्बे तकिये इत्यादि का प्रयोग करके सभी मुद्राओं को किया जाता है। 

जीवामुक्ति योग –  जीवामुक्ति योग में किसी भी मुद्रा (पोज) पर ध्यान केंद्रित करने के बजाय दो मुद्राओं के बीच की गति को बढ़ाने पर ध्यान दिया जाता है।

कृपालु योग –  कृपालु योग, साधक को को उसके शरीर को जानने, उसे स्वीकार करने और सीखने की शिक्षा देता है।

कुंडलिनी योग – कुंडलिनी योग, ध्यान की एक प्रणाली है। इसके द्वारा दबी हुई आंतरिक ऊर्जा को बाहर लाने का काम किया जाता है।

हठ योग – इसके द्वारा शारीरिक मुद्राएं सीखी जाती है। हठ का अर्थ बल से है और आधुनिक समय में जो अभ्यास किया जाता है वह अनिवार्य रूप से योग का यही रूप है जिसमें शारीरिक व्यायाम, आसन और श्वास अभ्यास पर ध्यान दिया जाता है। हठ योग, योग की बिल्कुल प्रारंभिक प्रक्रिया है, ताकि शरीर ऊर्जा के उच्च स्तर को बनाए रखने में सक्षम हो सके।

अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस हर साल 21 जून को मनाया जाता है।

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