यूं तो हर किसी का होता है एक परिवार

यूं तो हर किसी का होता है एक परिवार ।
पर मेरा परिवार बना है यह सारा संसार ।
कभी उलझी हुई, कभी सुलझी हुई ।
चारों ओर बिछी हुई, लोगों के प्यार ने हमको पाला।
यह जीवन मकड़ी का जाला,
सिरा जिसका हमें ना मिला ।।
कभी खिलती हुई कभी सिमटती  हुई,
खुशबू से महकती हुई, धरती मां ने मुझमे जान डाला।
यह जीवन फूलों की माला,
सिरा जिसका हमें ना मिला ।।
कभी सुलगती हुई, कभी बुझती हुई,
खुशियों से चहकती हुई, दोस्तों का बोलबाला।
यह जीवन ग़मों का निवाला ,
सिरा जिसका हमें ना मिला ।।
यह जीवन मुझे लावारिस का ,
यह जीवन मेरे आंखों की बारिश का।
यह जीवन मेरी गुजारिश का ,
सिरा जिसका हमें ना मिला।।
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मनीभाई नवरत्न

छत्तीसगढ़ प्रदेश के महासमुंद जिले के अंतर्गत बसना क्षेत्र फुलझर राज अंचल में भौंरादादर नाम का एक छोटा सा गाँव है जहाँ पर 28 अक्टूबर 1986 को मनीलाल पटेल जी का जन्म हुआ। दो भाईयों में आप सबसे छोटे हैं । आपके पिता का नाम श्री नित्यानंद पटेल जो कि संगीत के शौकीन हैं, उसका असर आपके जीवन पर पड़ा । आप कक्षा दसवीं से गीत लिखना शुरू किये । माँ का नाम श्रीमती द्रोपदी पटेल है । बड़े भाई का नाम छबिलाल पटेल है। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम में ही हुई। उच्च शिक्षा निकटस्थ ग्राम लंबर से पूर्ण किया। महासमुंद में डी एड करने के बाद आप सतत शिक्षा कार्य से जुड़े हुए हैं। आपका विवाह 25 वर्ष में श्रीमती मीना पटेल से हुआ । आपके दो संतान हैं। पुत्री का नाम जानसी और पुत्र का नाम जीवंश पटेल है। संपादक कविता बहार बसना, महासमुंद, छत्तीसगढ़

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