प्यार की बोली का, प्यार से जवाब दो- कविता – मौलिक रचना – अनिल कुमार गुप्ता “अंजुम”

प्रेम

प्यार की बोली का

प्यार की बोली का
प्यार से जवाब दो
प्यार के पालने में
जिन्दगी गुज़ार दो

प्यार एक एहसास है
घृणा को त्याग दो
प्यार की बोली का
प्यार से जवाब दो

प्यार से बोलो सभी से
प्यार से मिलो सभी से
प्यार एक उल्लास है
यह नहीं उपहास है

भावना प्यार की
प्यार से जगा के देख
अश्रुपूर्ण नेत्रों में
आस तो जगा के देख

दिल में किसी के प्यार की
ज्योति तो जगा के देख
प्यार मंद – मंद पवन
यह नहीं आघात है

प्यार एक चाहत है
प्यार विश्वास है
प्यार पतवार है
प्यार अलंकार है

प्यार को पतवार बना
जीवन संवार लो
प्यार की बोली का
प्यार से जवाब दो

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