KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

तुम गुलाब मैं तेरी पंखुरी

तुम गुलाब मैं तेरी पंखुरी तुम गुलाब, मैं तेरी पंखुरी तुम सुगंध, मैं हूँ सौन्दर्य |तुझमें है लालित्य समाया मुझमें रचा-बसा माधुर्य |सारा जग, तुमसे सुरभित

लूटती जनता पर कविता

करोना काल में लोग किस तरह से परेशान हुए जनता की वेदना को महसूस किया गया और उसको कविता के रूप में लिखा गया है यह मौलिक अप्रक्षित रचना मेरे द्वारा लिखी गयी है |

महादेवी वर्मा पर कविता- बाबूलाल शर्मा

प्रस्तुत कविता हिंदी साहित्य के विख्यात छायावादी कवयित्री महादेवी वर्मा पर लिखी गई है ।जिसके रचयिता बाबूलाल शर्मा जी हैं ।आपने दोहे छंद पर यह कविता लिखी है।