KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन- विभा श्रीवास्तव

प्रकृति से खिलवाड़ पर्यावरण असंतुलन " किलकारियाँ, खिलखिलाहट, अठखेलियाँ हवा के संग ....हमे बहुत याद आता है।बादलो का गर्जना ,बिजलियों का कड़कना ,और

क्यों जाति की बात करें

क्यों जाति की बात करें(१६,१६) जब जगत तरक्की करता हो,देश तभी उन्नति करता है।जब मानव सहज विकास करे,क्यों जाति द्वेष की बात करें।जाति धर्म मे पैदा होना,मनुजों

बादलो ने ली अंगड़ाई- वर्षा ऋतु पर गीत

बादलो ने ली अंगड़ाई- वर्षा ऋतु पर गीत बादलो ने ली अंगड़ाई,खिलखलाई यह धरा भी!हर्षित हुए भू देव सारे,कसमसाई अप्सरा भी!कृषक खेत हल जोत सुधारे,बैल संग हल से

कलम के सिपाही -मुंशी प्रेमचंद जी

कलम के सिपाही -मुंशी प्रेमचंद जी मेरे मूर्धन्य मुंशी प्रेमचंद जी थे बड़े " कलम के सिपाही "अब......."भूतो न भविष्यति"हे ! मेरे जन जन के हमराही !उपन्यास

मुंशी प्रेमचंद जी पर दोहे

मुंशी प्रेमचंद जी पर दोहे प्रेमचंद साहित्य में,एक बड़ी पहचान।कथाकार के नाम से,जानत सकल जहान।।उपन्यास लिखते गए,कफ़न और गोदान।प्रेमचंद होते गए,लेख क्षेत्र