KAVITA BAHAR
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छत्तीसगढ़ी रचना

भादों के अंजोरी म आगे तीजा तिथि

सूत बिहनिया उठके , मय करव अस्नान ।पार्वती ओ मैंइया तोरे हावे मोला धियान ।जइसन पाये तय अपन भोला भगवान।वइसन पावव हरजनम, मय अपन गोसान। लाली चौकी…

दारू विषय पर कविता

दारू विषय पर कविता छत्तीसगढ़ी कविता दारू पिये ल झन जाबे समारूदारू पिये ल झन जाबे,,,,गली-गली जूता खाबे समारू दारू पिये ल झन जाबे ,,,,!नाली म…

हसदेव नदी बचाओ अभियान पर कविता- तोषण कुमार चुरेन्द्र…

हसदेव नदी बचाओ अभियान पर कविता रुख राई अउ जंगल झाड़ीबचालव छत्तीसगढ़ के थाती लकोनों बइरी झन चीर सकयहसदेव के छाती लकिसम किसम दवा बूटीइही जंगल ले…

छत्तीसगढ़ी भोजन बासी पर गीत कविता

छत्तीसगढ़ के गाँव में बोरे बासी का बहुत ज्यादा महत्व है। मजदूर किसान सभी काम पर जाने से पहले घर से बासी खाकर निकलते हैं। बासी के महत्व को जानने वाले…