वीर नारायण सिंह माटी के शान

वीर नारायण सिंह माटी के शान

देस बर अजादी, नइ रिहिस असान ।
वीरमन लड़ीन अउ, हाेगिन बलिदान ।
सबोदिन हे अगुआ म छत्तीसगढ़िया ।
वीर नारायण सिंह ह, इ माटी के शान।

इक बेला राज म, महा दुकाल छाइस।
दुख पीरा घेरिस अउ सबला तड़पाइस।
कइसे देखे भुखमरी हमर वीर सहासी।
माखन ल लूटिस, फेर अनाज बटादिस।

आंदोलन के बात म अगुआ रइथे वीर।
सेना बनाइस अंग्रेज बर, जेल ला चीर।
नारायण तोर चरन वंदन धन्न धन्न  वीर।
देस खातिर लुटा दय तै,अपन के सरीर ।

दाई बबा के गुन ह मिल जाथे सौगात म।
देस परेम जिम्मेदारी, सौपे जाथे हाथ म। 
हे सियानहा! धन्नबाद हे तोर जुझारूपना
जेल म सपथ लेय ,भगाना अंग्रेजी सेना।

रजधानी मांझा म,  जय स्तंभ देथे सुरता।
कमती होही बखान ह नई होवे जी पूरता।
हे सोनाखनिहा! अंग्रेज ल लगाय लगाम।
आदिवासी बिंझवार ! तोला मोर प्रणाम।

🖊️मनीभाई नवरत्न

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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