चोंका -फूल व भौंरा
choka

चोंका -फूल व भौंरा

फूल व भौंरा ★★★★★बसंत परफूल पे आया भौरा बुझाने प्यास।मधुर गुंजन सेभौरा रिझाताचूसता लाल दलपीकर रसभौंरे है मतलबीक्षुधा को मिटाबनते अजनबीफूल को भूलछोड़ दी धूल जानउसे अकेला।शोषको की तरहमद से चूर ।तन…

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चोका:- नारी
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चोका:- नारी

चोका :-नारी★★★★★ हर युद्ध काजो कारण बनतालोभ, लालचकाम ,मोह स्त्री हेतुपतनोन्मुखइतिहास गवाहस्त्री के सम्मुखधाराशायी हो जाताबड़ा साम्राज्यशक्ति का अवतारनारी सबला।स्त्री चीर हरण सेकौरव नाशमहाभारत कालरावण अंतसीता हरण करस्त्री अपमानहर युग…

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चोका:- हरित ग्राम
choka

चोका:- हरित ग्राम

चोका :-हरित ग्राम★★★ ★★ हरित ग्राम...हरी दीवार परपेड़ का चित्र।छाया कहीं भी नहींदूर दूर तक।नयनाभिराम हैमहज भ्रम।आंखों में झोंक लियेधुल के कण।तात्कालिक लाभ नेकिया है अंधास्वार्थपरताखेलती अस्तित्व सेयह जान केबनते…

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कुछ तो है तेरे मेरे बीच -मनीभाई नवरत्न
kavita

कुछ तो है तेरे मेरे बीच -मनीभाई नवरत्न

कुछ तो है तेरे मेरे बीच -मनीभाई नवरत्न कुछ तो है  तेरे मेरे बीच  जो मैं कह नहीं सकता . और तुम सुन नहीं सकते. इस कुछ को खोज रहा…

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जिन्दगी अभी तू, मत हो उदास – मनीभाई नवरत्न
kavita

जिन्दगी अभी तू, मत हो उदास – मनीभाई नवरत्न

जिन्दगी अभी तू, मत हो उदास। छूना है तूम्हें ,सारा आकाश।। 1. जुड़ेंगे तेरे भी, नसीब के धागे।आसान नहीं पल, मंजिल से आगे।बदकिस्मती हर दिन होती नहीं पास। जिन्दगी अभी…

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मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 9

४०१/शम्मी के पेड़धनिष्ठा वसु व्रतमंगल स्वामी ४०२/मंडलाकारसौ तारे शतभिषाराहु की दशा। ४०३/ रोपित करेंपूर्व भाद्रपद मेंआम्र का वृक्ष। ४०४/मांस का दानउत्तरा भाद्रपदपूजा निम्ब के । ४०५/कांसे का दानरेवती पूषा व्रतमहुआ…

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मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 8

३५१/ धरा की तापहरते मौन वृक्षतप करते ३५२/ झुलस जायेतन मन जीवनऐसी तपन। ३५३/ है ऐसी धुपनैन चौंधिया जायेतेजस्वरूप । ३५४/   लू की कहरखड़ी दोपहर में  धीमा जहर ३५५/मेघ…

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मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 7

३०१/आज के नेताहै जनप्रतिनिधिनहीं सेवक। ३०२/है तू आजादबचा नहीं बहानातू आगे बढ़। ३०३/.मित्र में खुदाकरे निस्वार्थ प्रेमरिश्ता है जुदा। ३०४/ छाया अकालजल अमृत बिनधरा बेहाल। ३०५/ सांध्य सिताराशुक्र बन अगुआलड़े…

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मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 6

२५१/ रात की सब्जी~जय वीरू की जोड़ीआलू बैंगन। २५२/ पंचफोरन~बैंगन की कलौंजीप्लेट में सजा। २५३/ बाजार सजा~डलिया में बैंगनइतरा रहा। २५४/ सब्जी का राजा~(बैंगन)ताज भांति सिर मेंडंठल सजा।   २५५/…

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मनीभाई के हाइकु अर्द्धशतक भाग 5

२०१/ प्रभात बेला~   शहर में सजती रंगीन मेला। २०२/ हिलते पात~ दिवस सुधि लेते आई प्रभात। २०३/ खनिज खान~पठार की जमीनचौड़ा सपाट। २०४/रूई बिछौना~पामीर के पठारसंसार छत। २०५/ फंसा…

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