KAVITA BAHAR
SHABDON KA SHRIGAR

हिंदी कविता: मेरा दिन छोटा कैसे हो गया? -मनीभाई नवरत्न

मेरा दिन छोटा कैसे हो गया ? स्वर व रचना :- मनीभाई नवरत्न हाय ये वक्त!मुझे भगाया जा रहा है सरपट ।उसके हाथ में है लगामकैसे छीनूं ,कोई बताये मुझे?जो कोई हो

प्रायश्चित- मनीभाई नवरत्न

प्रायश्चित- मनीभाई नवरत्न हम करते जाते हैं कामवही जो करते आये हैंया फिर वो ,जो अब हमारे शरीर के लिएहै जरूरी। इस दरमियानकभी जो चोट लगेया हो जाये

हाय यह क्या हो गया?- मनीभाई नवरत्न

हाय यह क्या हो गया? https://youtu.be/X7nuK_BxSgc हाय यह क्या हो गया?महाभारत हो गया ।हुआ कैसे?एकमात्र दुर्योधन से!किसका बेटा ?अंधे धृतराष्ट्र का!पट्टी

अपना सच्चा साथी- मनीभाई नवरत्न

अपना सच्चा साथी इस जिंदगी में खड़ा बनके जो सच्चा साथीजो कभी ना छोड़े अकेला।यूं तो दुनिया है मेला पर बिन इसके सब छूट जाने हैं ।कांच की गुड़िया सी टूट जाने

खुजली- मनीभाई नवरत्न (हिन्दी कविता)

खुजली- मनीभाई नवरत्न https://youtu.be/ZghPWej9714 (1) मैं खोजता हूंकहां है मुझे खुजली ?मैं खुजाता रहता हूं ।कभी हाथ पैर, तो कभी सिर।इसका मतलब यह कतई

प्रेम और सच्चाई-मनीभाई नवरत्न

प्रेम और सच्चाई -मनीभाई नवरत्न https://youtu.be/s54erDOvKb8 मैं तुमसे दूर हूं तो मतलब नहीं कितुमसे दूर हूं।है अब भी मेरे जेहन मेंउतना ही प्रेम जितना कि