स्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान / मनीभाई नवरत्न
आध्यात्म और भक्तिस्वामी विवेकानन्द : जागरण का महागान (अतुकांत, मौलिक कविता) भारत की भूमिवह तपोभूमि हैजहाँ ऋषियों की वाणीअभी भी वायु में गूँजती है।उसी भूमि नेउन्नीसवीं शताब्दी मेंएक ऐसी तेजस्वी आत्मा को जन्म दियाजिसने आत्मा की रोशनी सेसमूची मानवता को दिशा दी—स्वामी विवेकानन्द। वे केवल संन्यासी नहीं थे,वे आधुनिक युग के महर्षि थे—तर्क और श्रद्धा का अद्भुत […]
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