मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

यह तुम्हारी नियति नहीं है!

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

यह तुम्हारी नियति नहीं है! तुमकुछ बनने नहीं आए हो।तुमकुछ याद करने आए हो। जिसे तुमखोज रहे हो—वहकभी खोया ही नहीं। खोजने वालाझूठा है।जिसे खोजना है,वहपहले सेमौजूद है। अपनीमूल सत्ता कोमत भूलो—वहतुम्हारेआज के अनुभवों सेकहीं आगे है। तुमअसीम हो।अपरिमेय। भले हीतुम्हारेखाने,सोचने,जीने के ढंग मेंइसकाकोई प्रमाण न दिखे। आदतेंइसे नहीं दिखातीं।चुनावइसे व्यक्त नहीं करते। फिर भीयह

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खोल से बाहर

मन और भावनाएँ

खोल से बाहर आकाश से प्रेमकोई भावना नहीं है।वह एक असहजता है—उस हर सीमा के प्रतिजिसे तुमने कभीघर मान लिया था। हर जीवनकिसी न किसी खोल मेंशुरू होता है।खोल सुरक्षा देता है,ऊष्मा देता है,पहचान देता है।शुरुआत मेंवह आवश्यक होता है। पर जो आवश्यक था,वहीस्थायी नहीं हो सकता। एक बिंदु आता हैजब वही खोलजिसने बचाया था,दम

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समय नहीं उड़ता, तुम बह जाते हो

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

समय नहीं उड़ता, तुम बह जाते हो समयकहीं भागता नहीं।वहतुम्हारे पीछे-पीछेचलता है। जैसा तुम मूल्य देते हो,वैसा हीसमय बँटता है। हर क्षणतुम स्वयं तय करते हो—ध्यान कहाँ जाएगा,ऊर्जा किसे मिलेगी,जीवन किस दिशा मेंढलेगा। भटकाव,कर्तव्य,इच्छाएँ—सबतुम्हारी प्राथमिकताओं केअनुवाद हैं। समयकोई रहस्य नहीं।वहएक दर्पण है—जो दिखाता हैकि तुम्हारे भीतरवास्तव मेंमहत्त्वपूर्ण क्या है। इसलिए जब तुम कहते हो—“पता ही

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एक दिन में अनंत समय है

समय और जीवन दर्शन, हिंदी कविता

एक दिन में अनंत समय है जो जानता हैकि घड़ी चल रही है,वहक्षण कोखाली लौटने नहीं देता। जीवन का सम्मानसमय के सम्मान सेशुरू होता है। तुम कहते हो—एक दिन मेंसिर्फ़ चौबीस घंटे होते हैं। पर यहसिर्फ़तुम्हारी परिभाषा है। ज़रा रुको।गिनती बदलो। एक दिन मेंकितने मिनट होते हैं?देखो—समयअचानकफैलने लगा। अबसेकंड गिनो।समयऔर फैल गया। और एक सेकंड?उसमेंअरबों

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जीवन भरो, वरना वह खुद भर जाएगा

हिंदी कविता

जीवन भरो, वरना वह खुद भर जाएगा अगर तुमअपने जीवन कोऊँचाई से नहीं भरोगे—आनंद से,बोध से,सौंदर्य से,पवित्रता से—तो जीवनखुद को भर लेगा। और वह भरेगाकचरे से। कभी नौकरी के नाम पर,कभी रिश्तों के बोझ में,कभी किसी और शोर में—जो दिखेगा ज़रूरी,पर होगा खोखला। मनुष्यआलस्य के लिए पैदा नहीं हुआ।वहसंघर्ष में जन्म लेता है।पूरा जीवनएक रणभूमि

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तुम आलसी नहीं हो, तुम प्रेमहीन हो

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

तुम आलसी नहीं हो, तुम प्रेमहीन हो आलस्यऊर्जा की कमी नहीं है।यहसमझ की कमी है। तुम अपने भीतर कीभूमि को नहीं जानते—इसलिएयह भी नहीं जानतेकि कौन-सा कर्मतुम्हें जीवित करेगा,कौन-सा प्रयाससचमुच फल देगा। कर्मऊर्जा माँगता है।और जबउस ऊर्जा कालाभ स्पष्ट न हो,तोमनक्रिया के बजायनिष्क्रियता चुन लेता है। यहीआलस्य कहलाता है। यदि तुमनेकभीसही कर्म कीमिठास चखी होती—उस

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प्रेमहीन काम, आनंदहीन जीवन

प्रेम और रिश्ते, हिंदी कविता

प्रेमहीन काम, आनंदहीन जीवन अगर कामप्रेम योग्य नहीं है,तो जीवनजीने योग्यकैसे होगा? कामदिन की एक फ़ाइल नहीं,वहतुम्हारी पहचान की धुरी है—दिन उसी के इर्द-गिर्द घूमते हैं,सोच उसी से आकार लेती है,रिश्तेउसी की छाया में साँस लेते हैं। काम को छोटा समझनाअपने अस्तित्व केकेंद्र को नकारना है। जहाँ तुम खड़े होऔर जो तुम करते हो—उनके बीचफाँक

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दिखावे का मन

हिंदी कविता

दिखावे का मन लोग आईने में नहीं,आँखों में खुद को देखते हैं—दूसरों की आँखों में। दुकान की रोशनी मेंशर्ट नहीं चुनी जाती,अपनी कीमत तौली जाती है—कहीं सस्ते न पड़ जाएँ हम। गला थोड़ा और खुला,जाँघ थोड़ी और ऊपर,कपड़ा नहीं,स्वीकृति पहनी जाती है। फिर वही मनरिश्तों की अलमारी खोलता है—देखो मेरा साथी,देखो मेरा प्रेम,देखो मेरा जीवन।

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स्वयं को देखना

हिंदी कविता

स्वयं को देखना खुद को जानने के लिएमैंने प्रश्न नहीं पूछे,मैंने अपने दिन देखे। घड़ी की सुइयों ने बतायामेरा समय कहाँ गिरता है,और रात ने बतायामेरा मन किसके पास भटकता है। मैंने अपने शब्द नहीं गिने,अपने कदम गिने—वे बार-बारउसी दिशा में जाते रहेजिसे मैं स्वीकार नहीं करता था। मैं बोला—मैं न्याय चाहता हूँ,मैं शांति चाहता

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कोई विश्वास पवित्र नहीं

हिंदी कविता

कोई विश्वास पवित्र नहीं मैंने देखा एक रोगी—खुलकर बोला, “दवा नहीं चाहिए,मुझे अपनी बीमारी प्यारी है।”कम से कम वह अपने पागलपन में ईमानदार था। पर अधिक खतरनाक है वह,जो मान लेता है कि बीमार है,फिर झूठी दवा थाम लेता है,और मुस्कुराता है,जैसे वह ठीक हो रहा हो।वह न केवल बीमार है,बल्कि चालाक भी है।और उसकी

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क्षुद्र को जाने दो

हिंदी कविता

क्षुद्र को जाने दो (Let the Petty Go) यदि तुम्हारा आत्म-मूल्यकिसी भी चीज़ पर टिका है,तो जीवनउसे डोरियों की तरह हिलाएगा,और तुम्हेंकठपुतली बना देगा। परिस्थितियाँ,संपत्ति,उपलब्धियाँ,मंज़िलें—इनमें से किसी कोअपने नाम की परिभाषा मत बनने दो। जो बाहर हैवह ठहरता नहीं।जो ठहरता नहीं,उस पर आत्म-मूल्य टिकानास्वयं को अस्थिर करना है। आत्म-मूल्य भी एक विचार है,और हर विचारकिसी

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आत्मविश्वास ही भय है (Confidence Is Fear)

हिंदी कविता

आत्मविश्वास ही भय है (Confidence Is Fear) डर का इलाजआत्मविश्वास नहीं होता।वह केवलडर पर डाला गयाएक मुखौटा है। गोली की तरह—क्षणिक राहत,पर बीमारी जस की तस। डर मिटता नहीं,चुपचाप भीतरऔर गहराता है। निर्भयतासीना तानकर खड़े होने में नहीं,बल्किकिसी के सामनेखड़े होने की ज़रूरत न रहने में है। जब खोने कोकुछ नहीं होता,तो डर किस बात

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