स्वप्नों के पार -मनीभाई नवरत्न
हिंदी कवितास्वप्नों के पार सपनों की इस बगिया में, छिपा है एक रहस्य,नयन मूँदते ही खुलता, अंतरतम का दर्पण विशेष्य।जहाँ न कोई सीमा होती, न बंधन का नाम,केवल भाव बहते रहते, अंतर्मन की ध्वनि संग्राम।। चेतन की सीमाओं से, जब मन आगे जाए,अवचेतन की गहराई में, नयी दुनिया दिख जाए।वहाँ दबे हुए स्वप्नों का, होता है
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