सर्वश्रेष्ठता पर कविता
प्रकृति और पर्यावरणसर्वश्रेष्ठता पर कविता एकअदना जीवबेबस कर दियाअसहाय-त्रस्त-सहमा मानव,छुप बैठा अपनों से बचकर,जो हर कोण ढाल से,अपनों सा दिखते हैं.लेकिन पहचान नहीं बताते आसानी से. अब उनमें वहीं नहींबल्कि कोई और भी है.जो जान पर तूला है.हाय! ये मानव कुछ तो भूला है.नहीं तो ये प्रकृति ,हमारी भी है मां.सच!उसे पता हैसंतुलन कैसे है रखना?परिवर्तन उसका […]
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