मनीभाई नवरत्न

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

स्वप्नों के पार -मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

स्वप्नों के पार सपनों की इस बगिया में, छिपा है एक रहस्य,नयन मूँदते ही खुलता, अंतरतम का दर्पण विशेष्य।जहाँ न कोई सीमा होती, न बंधन का नाम,केवल भाव बहते रहते, अंतर्मन की ध्वनि संग्राम।। चेतन की सीमाओं से, जब मन आगे जाए,अवचेतन की गहराई में, नयी दुनिया दिख जाए।वहाँ दबे हुए स्वप्नों का, होता है

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मातृभाषा बनाम माध्यम

हिंदी कविता

मातृभाषा बनाम माध्यम में शिक्षा का असली उद्देश्य क्या है? क्या अंग्रेजी माध्यम में पढ़ाना ही शिक्षा का मापदंड है? और इसके क्या समाधान हो सकते हैं ? इस पर प्रकाश डालने की कोशिश की गई है । आज भारत में शिक्षा का अर्थ, माध्यम पर भारी होता जा रहा है। शहरों में दूर और

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मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ- मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

मैं जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ,फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ;कर दिया किसी ने झंकृत जिनको छूकरमैं साँसों के दो तार लिए फिरता हूँ। मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ,मैं कभी न जग का ध्यान किया करता हूँ,जग पूछ रहा उनको, जो जग की गाते,मैं अपने मन का गान किया करता

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दरिद्र कौन / पद्ममुख पंडा

हिंदी कविता

“दरिद्र कौन” कविता, कवि पद्ममुख पंडा द्वारा रचित है। यह कविता उन लोगों पर आधारित है जो वास्तविक दरिद्रता (गरीबी) और स्वाभिमान को पहचानते हैं। इसमें कवि यह संदेश देने की कोशिश करते हैं कि दरिद्रता केवल धन की कमी नहीं होती, बल्कि नैतिक मूल्यों, दया और संवेदना की कमी भी दरिद्रता का रूप होती

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विज्ञान हर जगह की बुनियाद/ मनीभाई नवरत्न

विज्ञान, तकनीक और भविष्य, ,

विज्ञान की महिमा को सलाम करती यह कविता छात्रों में जिज्ञासा और सीखने की प्रेरणा जगाने के लिए लिखी गई है।यह रही विज्ञान पर एक कविता: विज्ञान है वो रोशनी,जो हर अंधेरे को मिटाती है,ज्ञान की किरण बनकर,सच की राह दिखाती है। प्रकृति के रहस्यों को,खोलती है विज्ञान की किताब,हर सवाल का उत्तर,ढूंढती है इसका

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शादी का चक्कर-कैसे दोगे ओलंपिक में टक्कर / मनीभाई नवरत्न

हास्य और व्यंग्य, हिंदी कविता

“शादी का चक्कर, कैसे दोगे ओलंपिक में टक्कर” मनीभाई नवरत्न का एक मजेदार और व्यंग्यात्मक रैप सांग है। यह गाना युवाओं और खेल प्रेमियों के बीच खासा लोकप्रिय है, और इसकी लाइनें अक्सर लोगों को हंसा देती हैं। इस रैप सांग का मुख्य उद्देश्य शादी और खेल के बीच तुलना करके हास्य उत्पन्न करना है।

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manibhai Navratna

राखी का बंधन/ मनीभाई नवरत्न

मन और भावनाएँ

गीतकार : मनीभाई नवरत्न गीत: “राखी का बंधन”** अंतरा 1:(brother voice)राखी का बंधन है, रिश्तों की पूजा , रिश्तों के इस धागे में, प्यार है छुपा ।(sister voice)तू है मेरा भाई, तू ही मेरा साया, मेरे इस जीवन को, खुशी से सजाया। कोरस:* रिश्तों की इस डोर में, बंधा है दिल हमारा, बहना के बिना

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Bhagat_Singh

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर / मनीभाई नवरत्न

हिंदी कविता

भगत सिंह तुम्हारा नाम अमर (Intro)देश की माटी का सपूत था वो,अंग्रेज़ों के लिए काल था।कभी डरते ना, कभी ना झुकते थे,आजादी का मिसाल था । (Chorus)भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमरतुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर। भगत सिंह, भगत सिंह, तुम्हारा नाम अमर ,तुम्हारे शौर्य वीरता को, गाता है घर घर।

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खुदीराम बोस

खुदीराम के नाम का गान /मनीभाई नवरत्न

देशभक्ति, हिंदी कविता

खुदीराम बोस भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के एक महान क्रांतिकारी थे, जिन्होंने देश के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए। उनके साहस, बलिदान और देशप्रेम को समर्पित एक गीत प्रस्तुत है: खुदीराम के नाम का गान (Verse 1)वो नन्हा वीर था, पर दिल में जोश था, नादान नहीं था , उसे होश था जिसके बलिदान से,

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भारत छोडो आन्दोलन

भारत छोड़ो का जयघोष (भारत छोड़ो आंदोलन पर एक कविता)

देशभक्ति,

यहां भारत छोड़ो आंदोलन पर एक कविता प्रस्तुत है: भारत छोड़ो का जयघोष सुनो कहानी वीरों की, जब भारत हुआ बेखौफ,आजादी का बिगुल बजा, उठा स्वतंत्रता का शोर।नव जागरण की लहर चली, एकता का उठा संकल्प ,भारत छोड़ो का नारा गूंजा, देश की हुई कायाकल्प । अंग्रेजों की हुकूमत से, तंग हो गया था आमजन,तोड़नी

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विश्व आदिवासी दिवस पर एक कविता

आदिवासी गाथा ( विश्व आदिवासी दिवस पर एक कविता )

महत्वपूर्ण दिन आधारित कविता, हिंदी कविता

यहां विश्व आदिवासी दिवस पर एक कविता प्रस्तुत है: आदिवासी गाथा जंगलों की गोद में बसा,एक अद्भुत संसार है।संस्कृति जिसकी अनोखी,वह आदिवासी परिवार है। धरती से गहरा नाता,और पेड़ों से प्यार है।पर्वतों की ऊंचाई में बसी ,उनका विशाल संसार है। त्योहारों की रंगीन छटा,और नृत्य की बात निराली।गीतों में छुपा है जीवन,कहानी उनकी कभी न

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doha sangrah

मनीभाई के दोहे ( Manibhai ke Dohe)

प्रकृति और पर्यावरण

मनीभाई के दोहे (1) जंगल मंदिर बन गये , शहर हुए अब खेत।मानव के करतूत से , हो गये पशु निश्चेत।। (2) मानव तेरी भूख ही , मांस नोच के खाय।है तू हिंसक पशु बड़ा, देखत सब थर्राय। (3) मानव रक्षक है प्रकृति ,मानव बन शैतान ।छोटे से सुख के लिए,काटत मुर्गा श्वान।। (4) प्रीत

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