ममतामयी माँ -मनीभाई “नवरत्न”

यहाँ माँ पर हिंदी कविता लिखी गयी है .माँ वह है जो हमें जन्म देने के साथ ही हमारा लालन-पालन भी करती हैं। माँ के इस रिश्तें को दुनियां में सबसे ज्यादा सम्मान दिया जाता है।

ममतामयी माँ

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माँ पर कविता

लाई दुनिया में पीड़ा सहकर।
बचपन बीता माँ-माँ कहकर।
स्वर्गानंद लिया गोद में रहकर।
आशीष रहा उनका मुझ पर।
एक शख्स में सारी सृष्टि समाई।
वो  माँ, जो ममतामयी कहलाई।
सुबह प्यार से वो,  हमें जगाती ।
भूख से पहले  खाना खिलाती ।
सही राह में चलना सिखलाती ।
हर बुराई  से, लड़ना बतलाती।
रिश्ते-नाते को जो निस्वार्थ निभाई ।
वो  माँ, जो ममतामयी कहलाई।
उसे मेरे पसंद का रहता ख्याल।
मैं खुशनसीब हूँ, जो माँ का लाल।
खुद से ज्यादा करें मेरी देखभाल।
माँ!  तू पूजनीय रहे चिरकाल।
चारदीवारी को, जो घर बनाई।
वो  माँ, जो ममतामयी कहलाई।

मनीभाई “नवरत्न”
भौंरादादर, बसना, महासमुंद(छ.ग.)

मनीभाई नवरत्न
मनीभाई नवरत्न

📝 कवि परिचय

यह काव्य रचना छत्तीसगढ़ के महासमुंद जिले के बसना ब्लाक क्षेत्र के मनीभाई नवरत्न द्वारा रचित है। अभी आप कई ब्लॉग पर लेखन कर रहे हैं। आप कविता बहार के संस्थापक और संचालक भी है । अभी आप कविता बहार पब्लिकेशन में संपादन और पृष्ठीय साजसज्जा का दायित्व भी निभा रहे हैं । हाइकु मञ्जूषा, हाइकु की सुगंध ,छत्तीसगढ़ सम्पूर्ण दर्शन , चारू चिन्मय चोका आदि पुस्तकों में रचना प्रकाशित हो चुकी हैं।

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